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पूनम बरनवाल

     हमारे समाज मे सालों से जात और धर्म का बहुत बड़ा प्रभाव रह चुका है।हमारा समाज शुरू से ही पुरूष प्रधान रहा है तो जाहिर है कि महिलाओं को इसी समाज मे दशकों तक अन्याय और मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

    जाहिर है ऐसे हालात में बिहार के एक गांव में जन्मी हुई एक लड़की को जन्म से ही लड़की होने का अर्थ पता चलने लगा।

     हम बात कर रहे है हमारे समाज की बहन और समाज सेवी श्रीमती पूनम बरनवाल जी की जिनका जन्म 14 अप्रैल 1969ई० में बिहार के पटना जिला के गांव बाढ़ में हुआ।बचपन से ही पूनम को आज़ादी से अपने जिंदगी जीने की छूट दी गई थी और इसी के कारण उन दिनों में उन्होंने अपना स्नातक पूरा किया।पूनम अपने घर की बड़ी बेटी थी और इसलिए बहुत जिम्मेवार भी थी। बचपन से ही उनका अध्यात्म में बड़ी रुचि थी और दया का वो भाव जो अनेको पग दर पग समाज-सेवा में खिंचता चला गया।

 सन 10 जुलाई 1989 ई० में उनकी शादी झारखंड राज्य के गिरिडीह शहर में एक छोटे से गांव मालदा में एक व्यवसायिक परिवार में हुआ।उनके पति का नाम श्री सुरेंद्र प्रसाद बरनवाल है।

       चूंकि पूनम की रुचि शुरू से ही समाजसेवा एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में थी,उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन के शुरूआती वर्षो में ही माँ गायत्री के कार्यों में जुट गई।गायत्री परिवार का हिस्सा बनकर,झारखंड के लगभग 100 से अधिक गावों में जाकर जन-जन को अध्यात्म में जोड़ने का कार्य करती रही।

  ये सन ---- की बात है जब हाथ मे छोटा बच्चा और दिसंबर की जोरदार सर्द में भी वो गुरु का कार्य करने से पीछे नही हटी।

       बाद में योग गुरु बाबा रामदेव के बुलावे पर लोगों को स्वस्थ रखने का उन्होंने बीड़ा उठाया।इस कार्य के लिए इन्हें देश के विभिन्न शहरों एवं संस्थाओं के द्वारा अनेक उपाधियों से नवाजा गया।

 अपने जीवनकाल में इन्होंने कई लोगो के गहन बीमारियों जैसे कैंसर तक को योग एवं आयुर्वेद से मुक्त कराया।

   पूनम ने पिछले 20 वर्षों में महिला उथान, योग प्रचार,गरीबी,उन्मूलन एवं शिक्षा के छेत्र में अद्वितीय कार्य किया और इसका लाभ झारखंड-बिहार के लाखों लोगों को मिला।

      सन 2008 में वो बतौर वार्ड पार्षद चुनी गई और उसमे उनका कार्य अति सराहनीय रहा जिसके तहत D.C,S.P पुलिस विभाग,शिक्षा विभाग एवं अनेक सामाजिक एवं आध्यात्मिक संघठन ने उन्हें सराहा।

    पूनम बतौर पत्नी उतनी ही अच्छी एवं कर्मठ है जितनी कि एक समाज सेविका।उनको घरेलू कार्य जैसे सिलाई,बुनाई,साक विज्ञान,घरेलू लघु-उद्योग जैसे छेत्रो में भी अपनी बेहतरीन प्रतिभा के लिए पुरस्कृत हुई है।

पूनम को आयुर्वेद एवं योगाभ्यास का अचूक ज्ञान है और इसके लिए इन्हें कई संस्थाओं ने योगाचार्य जैसी विशेष उपाधियों भी प्रदान किया गया है।साथ ही 12 साल से पतंजलि जिला महिला समिति की अध्यक्ष भी रह चुकी है एवं इन्होंने अभी तक 10000 से ज्यादा योग की कक्षाएं चला चुकी है एवं नित्य दिन खुद भी योग करती है।

  10 वर्षों तक वार्ड पार्षद राह चुकी पूनम बरनवाल के पास संपत्ति के नाम पर उनका बस परिवार है।आज भी वो 25 वर्ष पुराने मकान में रहती है और अपने ईमानदार चरित्र के कारण इन 10 वर्षों में एक कार तक नही खरीद पायीं।

    आज गिरिडीह में शायद ही ऐसा कोई वयक्ति हो जिनका स्नेह पूनम जी के साथ वयक्तिगत न हो।

   आज पूनम अध्यात्म की एक गुरु मानी जाती है,योग की बड़ी शिक्षक, आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी की जानकर एवं राजनीति में निपुन।

   बरनवाल समाज का सौभाग्य है कि ऐसी गुरु,ऐसी बहन,ऐसी नेत्री,ऐसी माँ हमारी मार्गदर्शक है।

    उनका प्रवचन एवं सान्निध्य हज़ारो हज़ार वयक्ति के जीवन सुधार का जरिया बना है।

पूनम बरनवाल 

1)अध्यक्ष,झारखंड प्रदेश बरनवाल महिला समिति।

2)ट्रस्टी,अखिल विश्व गायत्री परिवार।

3)ट्रस्टी,राम कृष्ण मिशन शरदेश्वरी आश्रम।

4)ट्रस्टी मेंबर,शांति भवन।

5)जिला योग प्रभारी,अखिल विश्व गायत्री परिवार।

6)कॉर्डिनेटर,भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा।

7)मेंबर,नारी सम्मान सुरक्षा समिति,जिला प्रसाशन।8)अध्यक्ष,केशरिया शक्ति संघ।

8)अध्यक्ष,केशरिया शक्ति संघ।