WELCOME TO BARANWAL DIRECTORY.

facebook

यहाँ लिखे अपना जीवन परिचय एवं संघर्ष, प्रेरणादायक घटना, कहानी, कविता, चुटकुला, कार्यक्रम एवं आपके अपने विचार

Ahibaran Ka vanshj hoon

बरनवाल कुल मे जन्म लिया .

 

आहिबरन का वंशज हूँ .

 

सदियो से जिसकी शाखाये फैल रही है ,

 

उसका एक अभिन्न अंग हूँ .

 

बरनवाल कुल मे जन्म लिया ,

 

आहिबरन का वंशज हूँ .

 

इस समाज के उठान मे जिंका अमुख योगदान है ,

 

महाराज आहिबरन उंका  नाम है !!!

 

देश व समाज  मे उंका त्याग अतुल्निय है .

 

महाराज आहिबरन हम  सब के लिय मान्निय है .

 

उनके विचार ,उनकी बाते , उनके उप्देशो को मानना है ,

 

बरनवाल समाज मे आयी विकृत्यो को हमे दुर करना है 

 

बरनवाल कुल मे जन्म लिया ,

 

आहिबरन का वंशज हूँ .

 

आओ हम सब मिलकर इस समाज का मार्ग दर्शक बने.

 

आओ हम सब मिलकर इस समाज के उठान का पर्यास करे.

 

बरनवाल कुल मे जन्म लिया ,

 

आहिबरन का वंशज हूँ .

 

हाथ जोड़ कर शीश झुकाकर महाराज आहिबरन का सम्मान करे .

 

अपने बरनवाल समाज का गुणगान करो .

 

अपने बरनवाल समाज का गुणगान करो . 

 

Written by vijay sir

बालिकाओं के लिए विशेष तीन दिवसीय निःशुल्क योग शिविर,का आयोजन

बरनवाल वैश्य सेवा समिति के सम्मेलन में वैश्य बरनवाल सभा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ बरनवाल राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने समाज की तरक्की के लिए एकजुटता का मंत्र दिया। अन्य वक्ताओं ने भी बरनवाल जाति के उत्थान व विकास पर जोर दिया। कहा कि समाज के लोग कदम उठाएं और बढ़ें। कार्यक्रम में कई जिलों के लोगों ने हिस्सा लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुति की धूम रही।नगर की प्रेमशंकर वाटिका में महाराजा अहिवरन की पुण्य स्मृति में स्वाधीनता संग्राम में उत्तर प्रदेश बरनवाल समाज के योगदान पर कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि वैश्य बरनवाल सभा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ बरनवाल और
 

पूनम बरनवाल

     हमारे समाज मे सालों से जात और धर्म का बहुत बड़ा प्रभाव रह चुका है।हमारा समाज शुरू से ही पुरूष प्रधान रहा है तो जाहिर है कि महिलाओं को इसी समाज मे दशकों तक अन्याय और मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

    जाहिर है ऐसे हालात में बिहार के एक गांव में जन्मी हुई एक लड़की को जन्म से ही लड़की होने का अर्थ पता चलने लगा।

     हम बात कर रहे है हमारे समाज की बहन और समाज सेवी श्रीमती पूनम बरनवाल जी की जिनका जन्म 14 अप्रैल 1969ई० में बिहार के पटना जिला के गांव बाढ़ में हुआ।बचपन से ही पूनम को आज़ादी से अपने जिंदगी जीने की छूट दी गई थी और इसी के कारण उन दिनों में उन्होंने अपना स्नातक पूरा किया।पूनम अपने घर की बड़ी बेटी थी और इसलिए बहुत जिम्मेवार भी थी। बचपन से ही उनका अध्यात्म में बड़ी रुचि थी और दया का वो भाव जो अनेको पग दर पग समाज-सेवा में खिंचता चला गया।

 सन 10 जुलाई 1989 ई० में उनकी शादी झारखंड राज्य के गिरिडीह शहर में एक छोटे से गांव मालदा में एक व्यवसायिक परिवार में हुआ।उनके पति का नाम श्री सुरेंद्र प्रसाद बरनवाल है।

       चूंकि पूनम की रुचि शुरू से ही समाजसेवा एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में थी,उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन के शुरूआती वर्षो में ही माँ गायत्री के कार्यों में जुट गई।गायत्री परिवार का हिस्सा बनकर,झारखंड के लगभग 100 से अधिक गावों में जाकर जन-जन को अध्यात्म में जोड़ने का कार्य करती रही।

  ये सन ---- की बात है जब हाथ मे छोटा बच्चा और दिसंबर की जोरदार सर्द में भी वो गुरु का कार्य करने से पीछे नही हटी।

       बाद में योग गुरु बाबा रामदेव के बुलावे पर लोगों को स्वस्थ रखने का उन्होंने बीड़ा उठाया।इस कार्य के लिए इन्हें देश के विभिन्न शहरों एवं संस्थाओं के द्वारा अनेक उपाधियों से नवाजा गया।

 अपने जीवनकाल में इन्होंने कई लोगो के गहन बीमारियों जैसे कैंसर तक को योग एवं आयुर्वेद से मुक्त कराया।

   पूनम ने पिछले 20 वर्षों में महिला उथान, योग प्रचार,गरीबी,उन्मूलन एवं शिक्षा के छेत्र में अद्वितीय कार्य किया और इसका लाभ झारखंड-बिहार के लाखों लोगों को मिला।

      सन 2008 में वो बतौर वार्ड पार्षद चुनी गई और उसमे उनका कार्य अति सराहनीय रहा जिसके तहत D.C,S.P पुलिस विभाग,शिक्षा विभाग एवं अनेक सामाजिक एवं आध्यात्मिक संघठन ने उन्हें सराहा।

    पूनम बतौर पत्नी उतनी ही अच्छी एवं कर्मठ है जितनी कि एक समाज सेविका।उनको घरेलू कार्य जैसे सिलाई,बुनाई,साक विज्ञान,घरेलू लघु-उद्योग जैसे छेत्रो में भी अपनी बेहतरीन प्रतिभा के लिए पुरस्कृत हुई है।

पूनम को आयुर्वेद एवं योगाभ्यास का अचूक ज्ञान है और इसके लिए इन्हें कई संस्थाओं ने योगाचार्य जैसी विशेष उपाधियों भी प्रदान किया गया है।साथ ही 12 साल से पतंजलि जिला महिला समिति की अध्यक्ष भी रह चुकी है एवं इन्होंने अभी तक 10000 से ज्यादा योग की कक्षाएं चला चुकी है एवं नित्य दिन खुद भी योग करती है।

  10 वर्षों तक वार्ड पार्षद राह चुकी पूनम बरनवाल के पास संपत्ति के नाम पर उनका बस परिवार है।आज भी वो 25 वर्ष पुराने मकान में रहती है और अपने ईमानदार चरित्र के कारण इन 10 वर्षों में एक कार तक नही खरीद पायीं।

    आज गिरिडीह में शायद ही ऐसा कोई वयक्ति हो जिनका स्नेह पूनम जी के साथ वयक्तिगत न हो।

   आज पूनम अध्यात्म की एक गुरु मानी जाती है,योग की बड़ी शिक्षक, आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी की जानकर एवं राजनीति में निपुन।

   बरनवाल समाज का सौभाग्य है कि ऐसी गुरु,ऐसी बहन,ऐसी नेत्री,ऐसी माँ हमारी मार्गदर्शक है।

    उनका प्रवचन एवं सान्निध्य हज़ारो हज़ार वयक्ति के जीवन सुधार का जरिया बना है।

पूनम बरनवाल 

1)अध्यक्ष,झारखंड प्रदेश बरनवाल महिला समिति।

2)ट्रस्टी,अखिल विश्व गायत्री परिवार।

3)ट्रस्टी,राम कृष्ण मिशन शरदेश्वरी आश्रम।

4)ट्रस्टी मेंबर,शांति भवन।

5)जिला योग प्रभारी,अखिल विश्व गायत्री परिवार।

6)कॉर्डिनेटर,भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा।

7)मेंबर,नारी सम्मान सुरक्षा समिति,जिला प्रसाशन।8)अध्यक्ष,केशरिया शक्ति संघ।

8)अध्यक्ष,केशरिया शक्ति संघ।

 

बरनवाल समाज की तिसरी में प्रखंड स्तरीय बैठक

तिसरी (गिरिडीह) : बरनवाल समाज की तिसरी में प्रखंड स्तरीय बैठक हुई जिसमें मुख्य अतिथि बरनवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष सदानंद प्रसाद बरनवाल और प्रदेश उपाध्यक्ष बैजनाथ प्रसाद मौजूद थे। बैठक में समाज में संगठित रहने राजनीतिक क्षेत्र में आगे बढ़ने और बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया। इस दौरान बरनवाल जाति को ओबीसी में नहीं जोड़ने पर चर्चा की गई। प्रदेश अध्यक्ष प्रसाद ने कहा कि हमारे समाज में किसी चीज की कमी नहीं है। सभी शांत मेहनती और बुद्धिजीवी लोग हैं। आज राज्य और देश में हमारे समाज के दर्जनों लोग उच्च पद पर आसीन हैं। उन्होंने अपने बच्चों को प्रशासनिक

माता पिता

माता-पिता !

 

ये शब्द सुनते ही आंखों के सामने जो मूर्ति उभर कर आती है, वो त्याग, ममता और समर्पण से भरपूर होती है। यूं तो हर इंसान के लिए उसके माता-पिता खास होते हैं,पर मेरे मां पापा की खासियत सिर्फ उनका प्यार नहीं बल्कि उनकी महत्वाकांक्षा और ढ़ृढ निश्चय है। मेरी मां एक छोटे-से गांव से थीं, शादी के बाद जब वो पापा के घर आईं तो उन्हें दादी के दबंग शासन के तले रहना पड़ा। वो तो फिर भी उन्होंने झेल लिया। पर फिर एक के बाद एक हुई चार बेटियों की वजह से उन्हें दादी, बुआ, चाचा और चाची से जो कठोर व्यवहार झेलना पड़ा, उसका असर उनकी सेहत पर पडने लगा। फिर भी सबकी नजरों में वापस इज्जत पाने की चाह में बार बार प्रेग्नेंट होती रहीं, लेकिन उनका शरीर इतना छिन्न हो चूका था, कि हर बार उनका गर्भपात होता रहा और उनकी स्थिति काफी नाजुक हो गयी थी। तब मेरे पापा जिन्होंने कभी दादी के खिलाफ आवाज नहीं उठायी थी, उन्होंने दो टुक में सबको कह दिया, उनके लिए बेटे से ज्यादा, बेटियों की मां जरुरी हैं। और उनकी बेटियाँ ही उनके लिए बेटे हैं। किसी को उनका बोझ उठाने की जरूरत नहीं है। वो अकेले ही सबको संभाल सकते हैं। सिर्फ यही नहीं उन्होंने मेरे चाचाजी, जिनके एक बेटी और दो बेटे हैं, उन्हें कहा कि अगर वो अपनी एक बेटी के लिए चार घंटे काम करेंगे तो वो अपनी चार बेटियों के लिए 16 घंटे काम करेंगे पर उनसे कम नहीं रखेंगे। मां पापा हम चार बेटियों और थोड़ी सी जमापूंजी लेकर अलग हो गए। और फिर शुरु हुई उनकी जिंदगी की जद्दोजहद। फिर से घर बसाने से लेकर, बिजनेस की शुरुआत, सब एक नये सिरे से करना था। पापा की मदद करने के लिए मां भी अपने घर का काम खत्म करके दुकान पर बैठने लगी। ये देखकर उनके बारे में कितनी ही अफवाहें दादी और चाचा ने फैलाई, आज लिखने में भी शर्म आती है। इन सबके बावजूद वे दोनों अपने दम पर बिजनेस बढाने में लगे रहे और इन सबके बीच, उनके मन में एक इच्छा पनपने लगी कि क्यों न बेटियों को इस काबिल बनाएं कि वो किसी पर आश्रित न रहें और समाज को दिखाएं कि बेटियां बेटों से कम नहीं। हालाँकि तब उन्हें ये भी पता नहीं था कि ये सब होगा कैसे। जहां खाने पहनने को भी पैसे पुरे नहीं पड रहे थे। वहां अब एक और खर्च। पर कहते हैं न जहां चाह वहां राह। मां के पास कुछ गहने थे, वह बेचकर बिजनेस में लगा दिया। खुद ही गेहुं चावल चुनने लगी, ताकि मजदूरी बच जाए और साफ अनाज के ज्यादा पैसे मिल जाए। वडी, नमकीन बनाकर दुकान में बेचने लगी। इसी तरह के और भी याद नहीं कितने ही उपाय लगाए, ताकि हम बहनों के पढने का खर्च चल सके। धीरे धीरे जिंदगी अपने पहिए पर दौड़ने लगी। हम बहनों ने भी पुरी कोशिश की कि उनके सपनों को पूरा कर सके। जब हम आगे की पढ़ाई करने के लिए बाहर गए, तब सबने मां पापा से कहा, उन्हें बाहर मत भेजो वरना बिगड़ जाएंगी या इतना पढाओगे तो इनके लायक लडका कहां मिलेगा या फिर शादी के लिए पैसे कहां से लाओगे। पर मां पापा ने इन सारी चिंताओं को दरकिनार कर के सिर्फ हमारी पढाई पर ध्यान दिया। आज उनके ही मेहनत और निश्चय का फल है कि हम सारी बहनें इंजीनियर डाक्टर बनकर अपने पैरों पर खड़ी हैं। इतना ही नहीं उन्होंने समाज की सभी रीतियों कुरीतियों को निभाते हुए, अपनी सारी जमीन जायदाद बेचकर हमारी शादी अच्छे से अच्छे घरों में करायीं। हमारी दादी तो नहीं रहीं पर जिस चाचाजी ने हम बेटियों की वजह से मां पापा से रिश्ता तोड़ लिया था, वो हमारे मायके जाने पर हमसे मिलने भी आते हैं और घर भी बुलाते हैं। हमारे मां पापा और हम बहनों की आज सभी मिसालें देते हैं। हम बहनों के पति भी उन्हें इतना प्यार और सम्मान देते हैं कि वे सबसे कहते फिरते हैं कि उन्होंने बेटियों को विदा नहीं किया, बल्कि बेटे घर लाएं हैं। इन सबसे बड़ी बात तो यह है कि इतना पाने के बाद भी उनमें लेश मात्र भी घमंड नहीं है। बल्कि वह सबकी मदद करने को तत्पर रहते हैं, खासकर अगर किसी लड़की की पढ़ाई या शादी में मदद की जरूरत हो। तो बताइये हैं ना हमारे मां पापा कुछ अलग और कुछ ज्यादा ही खास। मुझे गर्व है कि ये मेरे मां पापा हैं।

भारत के सबसे बङा राज्य उत्तर प्रदेश के पतंजलि महिला राज्य प्रभारी वंदना

:भारत के सबसे बङा राज्य उत्तर प्रदेश के पतंजलि महिला राज्य प्रभारी वंदना बरनवाल को कुशल कार्य के लिए स्वामी रामदेव ने सम्मानित किए।

बरनवाल महिला संघ के द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

बरनवाल महिला संघ के द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 08/03/2018 को श्रीमती अर्चना बरनवाल पत्नी अनुराग बरनवाल मोहल्ला बहादुर नगर के निवास स्थान पर श्रीमती अनुग्रह बरनवाल एवम श्रीमती चित्रा बरनवाल को सम्मानित किया गया ।कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नेहा बरनवाल के द्वारा किया गया ।इस अवसर पर समाज की अनेक गणमान्य महिलायें उपस्थित रहीं ।

श्रीमती प्रीतिमा बरनवाल - अध्यक्ष
श्रीमती इला बरनवाल - सचिव
श्रीमती वंदना बरनवाल - कोषाध्यक्ष

फुसरो में महिला समिति ने मनाया श्रावण महोत्सव

बरनवाल महिला समिति फुसरो द्वारा नया रोड स्थित लाल मोहन पेट्रोल पम्प परिसर में सावन महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम की षुरूआत भगवान श्रीकृश्ण स्तुती व मां गायत्री की अर्चना से की गयी। मुख्य अतिथि झारखंड प्रदेष महिला समिति की अध्यक्षा पुनम बरनवाल ने कहा कि महिलाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना होगा। प्रधानमंत्री मोदी के बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना होगा। कहा कि भ्रुण हत्या पर महिलाओं के बीच जागरूकता लाना होगा। रंगारंग कार्यक्रम में कृश्ण की झांकी, झुला सजावट आदि के अलावे महिलाओं ने भजन व गीत की प्रस्तुत किया एवं बच्चों के बीच कुर्सी रेस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंजू बरनवाल व संचालन अर्चना बरनवाल ने किया। मौके पर पुश्पा बरनवाल, सविता बरनवाल, राधा बरनवाल, उमा देवी, पुनम बरनवाल, प्रगति भारती सहित दर्जनों महिला मौजूद थी।

"बरन उत्कर्ष" का विमोचन समारोह, दिनांक 29.07.2018

दिनांक 29.07.2018 को बरनवाल भवन, पटना में श्रीभारतवर्षीय बरनवाल वैश्य महासभा, बिहार इकाई के मुख पत्र "बरन उत्कर्ष" का विमोचन समारोह सम्पन्न हुआ। इस समारोह के मुख्य अतिथि श्रीभारतवर्षीय बरनवाल वैश्य महासभा के संरक्षक श्री शिवकुमारबरनवाल, नेशन 24 न्यूज़ के चीफ एडिटर नीरज कुमार कर्मशील, बिहार इकाई के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, महामंत्री श्री अशोक कुमार, झारखण्ड महिला बरनवाल समिति की अध्यक्ष श्रीमती पूनम बरनवाल आदि गणमान्य व्यक्तियों ने पत्रिका का विमोचन किया।
.
डॉ. नीतीश पालित
मुख्य संपादक
बरन उत्कर्ष।

नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ का दीप यज्ञ

दिनांक 26/06/18 को नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ का दीप यज्ञ के द्वारा समापन किया गया जिसके पुर्णाहुति में कई ने दहेज मुक्त शादी करने एवं नशा छोड़ने का संकल्प लिया।
जिसमे मुख्य अतिथि पूनम बरनवाल थे।

बरणोदय त्रैमासिक पत्रिका का प्रथम वार्षिकोत्सव

दिनांक 17-06-2018 को गया के स्वराजपुरी रोड स्थित श्री मोहन लाल जीरादेई सेवा सदन (बरनवाल भवन ) में बरणोदय त्रैमासिक पत्रिका का प्रथम वार्षिकोत्सव डा० अरूण कुमार गया के नेतृत्व / संयोजकत्व मे हर्षोल्लास संपन्न हुआ । इस क्रम मे दहेजमुक्ति अभियान के बैनर तले दहेजमुक्ति का जन्मोत्सव मनाया गया अर्थात् दहेज के विरोध मे पहली बार उपस्थित लोगों द्वारा गंभीरतापूर्वक वाद विवाद हुआ एवं इसके ख़िलाफ़ जमकर आक्रोश प्रदर्शित किया गया । आठ लोगों ने दहेज नहीं लेने का घोषणा पत्र प्रस्तुत किया गयाजिनका नाम निम्नलिखित है :-
1- श्री गोपाल प्रसाद पटना 
2-डा० अरूण कुमार गया 
3-डा० रणजीत कुमार पटना 
4- श्री शिव कुमार बाबू पटना 
5-श्री आशीष कुमार सुघड़ी (नवादा)
6- श्रीमती पूनम बरनवाल गिरिडीह 
7-श्रीमती सुनीता बरनवाल नवादा 
8-श्री अनुप भरतिया पटनासिटी